Kantara A Legend: Chapter 1 Movie Review – सच कहूँ तो, 2022 में जब मैंने पहली ‘कांतारा’ देखी थी, तो मैं स्तब्ध रह गया था। वह केवल एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक अनुभव था। इसलिए, जब ‘कांतारा: ए लेजेंड – चैप्टर 1’ की घोषणा हुई, तो मेरी उम्मीदें आसमान छू रही थीं। और अब, फिल्म देखने के बाद, मैं कह सकता हूँ – ऋषभ शेट्टी ने एक बार फिर इतिहास रचा है!

यह प्रीक्वल (पुरानी कहानी) आपको उस दुनिया की शुरुआत में ले जाता है, जहाँ से सब कुछ शुरू हुआ। यह सिर्फ एक एक्शन ड्रामा नहीं, बल्कि हमारी जड़ों, आस्था और प्रकृति के साथ हमारे अटूट रिश्ते का एक भव्य जश्न है।
Kantara A Legend: Chapter 1 Movie Review
कहानी की गहराई: दैव की उत्पत्ति
फिल्म की कहानी आपको कदंब राजवंश के युग में ले जाती है। पिछली फिल्म में जो रहस्य और लोककथाएँ हमें सुनाई गई थीं, ‘चैप्टर 1’ उनकी उत्पत्ति को दर्शाता है। यह कहानी है बर्मे (ऋषभ शेट्टी) की, एक योद्धा जिसका जीवन जंगल, राजाओं के लालच और दैवीय हस्तक्षेप से घिरा हुआ है।
यह कहानी दिखाती है कि कैसे सत्ता का अहंकार और प्रकृति का असंतुलन एक दैवीय संरक्षक (पंजुरली दैव) को जागृत करता है। विश्वास कीजिए, कहानी का ताना-बाना इतना मज़बूत है कि आप एक पल के लिए भी अपनी सीट से हिल नहीं पाएंगे।
तीन चीज़ें जिसने मुझे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया:
- ऋषभ शेट्टी: एक्टर नहीं, जादूगर! देखिए, ऋषभ शेट्टी (Rishab Shetty) ने निर्देशन और लेखन के साथ-साथ एक्टिंग में जो किया है, वह अविश्वसनीय है। बर्मे के रूप में उनकी आँखें, उनका गुस्सा, और दैवीय रूप धारण करने के दौरान उनका शारीरिक परिवर्तन… हर दृश्य में वह आग लगा देते हैं। ख़ासकर क्लाइमेक्स, वह दृश्य ऐसा है जिसे आप सिनेमा हॉल में सीटी बजाए बिना नहीं रह सकते!
- विजुअल्स और सिनेमैटोग्राफी: आँखों के लिए दावत! अरविंद एस. कश्यप की सिनेमैटोग्राफी को मेरा सलाम! जंगल, बारिश, कीचड़, और पुराने युग की भव्यता… हर फ्रेम एक पेंटिंग जैसा लगता है। फिल्म की दुनिया इतनी वास्तविक लगती है कि आप खुद को उस कदंब साम्राज्य का हिस्सा महसूस करने लगते हैं। वीएफएक्स का इस्तेमाल भी इस तरह किया गया है कि वह कहानी को और भी शक्तिशाली बनाता है।
- संगीत (BGM): रोंगटे खड़े करने वाला अनुभव! बी. अजनीश लोकनाथ का संगीत फिल्म की असली जान है। जब ढोल-नगाड़े बजते हैं, जब ‘भूत कोला’ के दृश्य आते हैं, तो आपको लगता है कि कोई शक्ति सचमुच आपके अंदर प्रवेश कर रही है। यह सिर्फ बैकग्राउंड म्यूजिक नहीं है, यह फिल्म का हृदय है, जो हर इमोशन को दस गुना बढ़ा देता है।
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मेरा व्यक्तिगत मत (Thoda Dil Ki Baat)
हाँ, फिल्म थोड़ी लंबी ज़रूर है, और बीच में कॉमेडी के कुछ सीन हैं जो मुख्य कहानी की रफ्तार को हल्का धीमा कर देते हैं। लेकिन, जब आप क्लाइमेक्स तक पहुँचते हैं, तो ये छोटी-मोटी कमियाँ आपको याद भी नहीं रहतीं।
यह फिल्म ‘बाहुबली’ या ‘KGF’ जैसी वॉर ड्रामा बनने की कोशिश नहीं करती, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर टिकी रहती है, और यही इसकी सबसे बड़ी जीत है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह भारतीय सिनेमा की शक्ति का एक नया अध्याय है।
क्या इसे देखना चाहिए?
अगर आपको सिनेमा में रोमांच, आस्था, शानदार एक्शन और एक दिल को छू लेने वाली कहानी चाहिए, तो इस फिल्म को तुरंत देखिए। इसे बड़े पर्दे पर देखने का अनुभव ही कुछ और है।
यह फिल्म आपको एक ‘दैवीय’ दुनिया की यात्रा पर ले जाएगी, जिसे आप सालों तक नहीं भूल पाएंगे। मेरी तरफ से इसे पूरे नंबर!