Dilmaar Movie Review: जब प्यार का जुनून हदें पार कर जाए!

Dilmaar Movie Review – हेलो दोस्तों! आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसी फिल्म की जिसने बॉक्स ऑफिस पर अपनी एक अलग छाप छोड़ी है फिल्म ‘दिलमार’ (Dilmaar)। यह कोई सीधी-सादी लव स्टोरी नहीं है; यह प्यार, एक्शन और एक जुनूनी दिमाग का तूफानी मेल है। कन्नड़ सिनेमा के जाने-माने राइटर एम. चंद्रमौली (जिन्होंने ‘KGF’ के लिए शानदार डायलॉग्स लिखे) ने इसे डायरेक्ट किया है, तो डायलॉग्स में दमदार मसाला होना तो तय है!

Dilmaar Movie Review

Dilmaar Movie Review

कहानी की गहराई में उतरें: क्या प्यार अंधा होता है?

‘दिलमार’ हमें एक गाँव में ले जाती है जहाँ हमारी मुलाकात शुक्ला (राम गौड़ा) से होती है। शुक्ला एक ऐसा लड़का है जिसका प्यार… खैर, उसे प्यार कहना भी मुश्किल है। यह तो जुनून की पराकाष्ठा है! वह गाँव की लड़की अक्षरा (अदिति प्रभुदेवा) के पीछे पड़ा है, जो पहले से ही किसी और को अपना मान चुकी है और जल्द ही शादी करने वाली है।

शुक्ला का फंडा एकदम साफ है: “मैं तुमसे प्यार करता हूँ, तो तुम्हें मुझसे प्यार करना ही होगा।

“इधर, एक तरफ शुक्ला का सिरफिरा प्यार है, और दूसरी तरफ कहानी में डॉन भार्गव (Sai Kumar) का एन्ट्री होती है, जो अपने भाई का बदला लेने के लिए शुक्ला को ढूंढ रहा है। फिल्म का पहला हिस्सा आपको तेज़ एक्शन और ‘मास’ डायलॉग्स से एंटरटेन करता है, ठीक वैसा ही, जैसा चंद्रमौली साहब की फिल्मों में देखने को मिलता है।

असली खेल तो सेकंड हाफ में है!

फिल्म का असली जादू तब शुरू होता है जब डायरेक्टर हमें शुक्ला के मन के अंदर झाँकने का मौका देते हैं। एक फ्लैशबैक सीन में उसकी मुलाकात माया (डिम्पल हयाती) से होती है, जिससे पता चलता है कि शुक्ला इतना अलग और हद से गुज़रा हुआ क्यों है। वह तर्क से नहीं, सिर्फ अपनी फीलिंग्स से चलता है चाहे सामने दीवार हो या मौत!

  • शुक्ला का दर्शन: यकीन मानिए, शुक्ला ऐसे-ऐसे डायलॉग्स बोलता है कि आप सोच में पड़ जाएंगे “भगवान हर जगह है, इसलिए मैं लाइट के खंभे की पूजा करता हूँ।” यह किरदार आपको एक पल डराएगा, तो अगले पल उसकी अकेली सच्चाई पर तरस आएगा।
  • एक्शन और स्टाइल: फिल्म की स्टाइलिंग और एक्शन सीक्वेंस काफी दमदार हैं, जो ‘KGF‘ की याद दिलाते हैं।

किसने क्या किया? (The Cast)

कलाकार भूमिका हमारा अनुभव
राम गौड़ा शुक्ला (हीरो) एक बोल्ड और ज़बरदस्त डेब्यू! पागलपन और प्यार के बीच झूलता किरदार।
अदिति प्रभुदेवा अक्षरा प्यार और डर के बीच फंसी लड़की का रोल बखूबी निभाया।
साई कुमार डॉन भार्गव अपनी दमदार आवाज़ से छाप छोड़ी, पर किरदार को और गहराई मिल सकती थी।
डिम्पल हयाती माया भले ही स्क्रीन टाइम कम हो, पर यादगार बन गईं।

 

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अंतिम फैसला: क्या ‘दिलमार’ दिल जीतेगी?

‘दिलमार’ एक अनोखी कोशिश है जो दिखाती है कि सच्चा प्यार और जुनून में कितना पतला सा फर्क होता है। अगर आप एक्शन, साइकोलॉजिकल ड्रामा और ज़ोरदार डायलॉग्स के शौकीन हैं, तो इसे मिस न करें। हालांकि, फिल्म थोड़ी लंबी खिंचती है और कुछ हिस्सों में ओवर-द-टॉप लगती है, लेकिन शुक्ला का किरदार इसे यादगार बनाता है।

हमारा स्कोर: ⭐⭐⭐ (3/5)

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