The Girlfriend Movie Review: जब ‘प्यार’ ज़हर बन जाए! रश्मिका ने इस कहानी को जीकर दिखाया है

The Girlfriend Movie Review – देखिए, हमें लगता है कि कॉलेज में प्यार होना दुनिया का सबसे हसीन एहसास होता है, है न? भूमा (रश्मिका मंदाना) भी बिल्कुल ऐसी ही थी। एक सीधी-सादी, मासूम लड़की, जो इंग्लिश लिटरेचर की किताबें पढ़ती है और सपने देखती है। उसकी ज़िंदगी में एंट्री होती है विक्रम (धीक्षित शेट्टी) की। शुरुआती दिनों में उनका रिश्ता बिल्कुल परियों की कहानी जैसा लगता है कॉफी डेट्स, लंबी बातें और एक-दूसरे के लिए बेपनाह प्यार।

The Girlfriend Movie Review

The Girlfriend Movie Review

पर कहते हैं न, हर चमकदार चीज़ सोना नहीं होती? ये ‘प्यार’ धीरे-धीरे अधिकार जताना (Possessiveness) और घुटने वाला कंट्रोल बन जाता है। विक्रम को हर चीज़ पर भूमा की मर्ज़ी से ज़्यादा अपनी मर्ज़ी चाहिए। इधर घर पर भूमा के पिता (राव रमेश) भी उसे अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं। सोचिए, एक लड़की जो अपनी ज़िंदगी की बागडोर किसी को देना नहीं चाहती, वो दो ऐसे आदमियों के बीच फंस जाती है जो उसे पूरी तरह कंट्रोल करना चाहते हैं।

फिल्म इसी घुटन भरी जद्दोजहद को दिखाती है। क्या भूमा इस जाल से बाहर निकल पाएगी? और क्या उसे अपनी आज़ादी की कीमत चुकानी पड़ेगी? यही इस कहानी का दिल है।

रश्मिका मंदाना: ‘नेशनल क्रश’ से ‘नेशनल परफ़ॉर्मर’ तक का सफ़र

ये कहना गलत नहीं होगा कि ये फिल्म पूरी तरह से Rashmika Mandanna के कंधों पर टिकी है। आप उन्हें ‘नेशनल क्रश’ कहते थे, इस फिल्म के बाद आप उन्हें ‘नेशनल परफ़ॉर्मर’ कहेंगे।

भूमा का किरदार निभाना आसान नहीं था। एक लड़की जो अंदर से टूट चुकी है, जो चीखना चाहती है पर चुप रहती है। रश्मिका ने आँखों से अभिनय किया है। उनके चेहरे पर डर, उलझन, और फिर खुद को पाने की छोटी सी चिंगारी सब कुछ साफ दिखता है। जब वह स्क्रीन पर चुपचाप बैठी होती है, तब भी उनकी खामोशी बहुत कुछ कह जाती है। ख़ासकर इंटरवल से पहले का और क्लाइमेक्स का दृश्य तो दिल दहला देता है।

वहीं, धीक्षित शेट्टी ने विक्रम का रोल बखूबी निभाया है। उनका किरदार इतना विलेन जैसा है कि दर्शक उनसे नफ़रत करने लगेंगे, और यही उनकी जीत है। राव रमेश और रोहिणी भी अपने छोटे, पर असरदार किरदारों से कहानी को मज़बूती देते हैं।

क्यों देखें? और क्या थोड़ा धीमा है?

जो बात इसे खास बनाती है (Highlights):

  • रिश्तों की कड़वी सच्चाई: यह फिल्म किसी फिल्मी प्यार को नहीं दिखाती, बल्कि असली ज़िंदगी के उन रिश्तों को सामने लाती है जहाँ प्यार की आड़ में मानसिक शोषण होता है। ये फिल्म हर उस लड़की के लिए है जिसने कभी अपने रिश्ते में घुटन महसूस की हो।
  • डायरेक्शन का ईमानदारी भरा नज़रिया: निर्देशक राहुल रविन्द्रन ने कहानी को महिला के नज़रिए से ईमानदारी से दिखाया है। उन्होंने कुछ प्रतीकात्मक दृश्यों (Symbolic Scenes) का इस्तेमाल किया है, जैसे कि बाथरूम का घुटन भरा दृश्य, जो भूमा की मानसिक स्थिति को दिखाता है।
  • क्लाइमेक्स जो ताक़त देता है: फिल्म का अंत हमें कमज़ोर नहीं, बल्कि सशक्त महसूस कराता है।

कहाँ लगा ब्रेक? (Drawbacks):

  • शुरुआत में धीमी रफ़्तार: अगर आप तेज़-तर्रार फिल्मों के शौकीन हैं, तो पहला घंटा आपको थोड़ा धीमा लग सकता है। कहानी अपनी असली पकड़ इंटरवल से थोड़ी पहले बनाती है।
  • थोड़ी नीरस (Monotonous): कई जगह पर भूमा की उदासी को बार-बार दिखाया गया है, जिससे कहानी थोड़ी दोहराव वाली लग सकती है।

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हमारा फ़ैसला: एक ज़रूरी फिल्म

‘द गर्लफ्रेंड’ सिर्फ एक फिल्म नहीं है; यह उन सभी लड़कियों के लिए एक आईना है जो प्यार और अपनी आज़ादी के बीच झूल रही हैं। यह आपको हँसाएगी नहीं, पर सोचने पर मजबूर ज़रूर करेगी। अगर आप गहराई, इमोशन और शानदार परफ़ॉर्मेंस वाली फिल्में पसंद करते हैं, तो रश्मिका मंदाना की इस बेहतरीन कोशिश को ज़रूर देखें।

  1. फिल्म: द गर्लफ्रेंड (The Girlfriend)
  2. मुख्य कलाकार: रश्मिका मंदाना, धीक्षित शेट्टी
  3. निर्देशक: राहुल रविन्द्रन
  4. क्यों देखें: रिश्तों में छिपी ज़हरिली सच्चाई को समझने के लिए।
  5. हमारा नज़रिया (Rating): 3.5/5

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