Single Papa Movie Review: जब एक ‘मस्तमौला’ लड़का खुद बच्चा पालने की ज़िम्मेदारी उठाता है

Single Papa Movie Review – क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसा आदमी, जो खुद अपनी ज़िंदगी में थोड़ा बेपरवाह और ‘मैन-चाइल्ड’ किस्म का हो, अचानक एक नन्हे से बच्चे का पिता बन जाए? नेटफ्लिक्स की नई सीरीज़ ‘सिंगल पापा’ इसी दिलचस्प और इमोशनल सफ़र को हमारे सामने रखती है।

Single Papa Movie Review

अगर आप इस वीकेंड कुछ हल्का-फुल्का और दिल को छू लेने वाला देखना चाहते हैं, तो यह रिव्यू आपके बड़े काम आएगा।

Single Papa Movie Review

कहानी: एक अनोखा और साहसी फैसला

कहानी है गौरव गहलोत (Kunal Khemu) की, जिसे सब प्यार से ‘जीजी’ कहते हैं। गौरव का हाल ही में तलाक हुआ है और वो अपनी ज़िंदगी के एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ सब कुछ उलझा हुआ है। लेकिन तभी वो एक ऐसा फैसला लेता है जो सबको चौंका देता है – बच्चा गोद लेने का!

एक ‘सिंगल मैन’ का बच्चा गोद लेना हमारे समाज में आज भी बड़ी बात मानी जाती है। सीरीज़ इसी संघर्ष को दिखाती है कि कैसे एक पिता को न केवल बच्चे की परवरिश करनी पड़ती है, बल्कि अपने परिवार और समाज के उन तीखे सवालों का सामना भी करना पड़ता है जो अक्सर एक ‘सिंगल फादर’ पर उठाए जाते हैं।

कलाकारों की परफॉरमेंस: दिल जीत लेने वाला अभिनय

  • कुणाल खेमू: कुणाल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो कितने नेचुरल एक्टर हैं। उन्होंने एक पिता की घबराहट, उसकी ममता और उसकी हंसी को बहुत ही सादगी से निभाया है। जब वो पर्दे पर परेशान होते हैं, तो आपको उन पर तरस आता है और जब वो मुस्कुराते हैं, तो खुशी होती है।
  • मनोज पाहवा और आयशा रज़ा: गहलोत परिवार के माता-पिता के रूप में इन दोनों की जोड़ी कमाल की है। इनके बीच की नोक-झोंक और अपने बेटे के फैसले को स्वीकार करने की जद्दोजहद बहुत ही असली लगती है।
  • प्राजक्ता कोली: प्राजक्ता ने गौरव की बहन का किरदार निभाया है जो अपनी मॉडर्न सोच से कहानी को एक नई दिशा देती हैं।

इस सीरीज़ की सबसे अच्छी बातें (What works)

  1. मर्दानगी की नई परिभाषा: अक्सर माना जाता है कि बच्चा पालना सिर्फ माँ का काम है, लेकिन यह शो दिखाता है कि एक पुरुष भी उतना ही संवेदनशील और केयरिंग पिता बन सकता है।
  2. कॉमेडी और इमोशन का मेल: इसमें आपको हंसाने वाले पल भी मिलेंगे और कुछ ऐसे दृश्य भी जो आपकी आँखों को नम कर देंगे।
  3. असली लगने वाले किरदार: यह कोई ऐसी कहानी नहीं है जो फिल्मी लगे, बल्कि यह आपके और हमारे घर की कहानी जैसी लगती है।

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कहाँ कुछ कमी रह गई?

सीरीज़ के कुल 6 एपिसोड हैं, लेकिन बीच-बीच में कहानी की रफ्तार थोड़ी धीमी हो जाती है। कुछ जगह पर ऐसा लगता है कि ड्रामा थोड़ा ज़्यादा बढ़ा दिया गया है। साथ ही, गुड़गांव की उस भव्य लाइफस्टाइल को दिखाने के चक्कर में कभी-कभी कहानी की सादगी कहीं खो जाती है।

मेरा नज़रिया: क्या आपको यह देखनी चाहिए?

हाँ, बिल्कुल! ‘सिंगल पापा’ एक ऐसी सीरीज़ है जिसे आप अपने माता-पिता या भाई-बहनों के साथ बैठकर देख सकते हैं। यह हमें सिखाती है कि परिवार सिर्फ खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि साथ रहने और एक-दूसरे को समझने से बनता है।

रेटिंग: 3.5/5 स्टार ⭐

अंतिम राय: अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं जो देखने के बाद चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान छोड़ जाएँ, तो इस वीकेंड नेटफ्लिक्स पर ‘सिंगल पापा’ ज़रूर देखें।

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