Aan Paavam Pollathathu Movie Review – क्या आपने कभी सोचा है कि प्यार भरी शादी के कुछ महीनों बाद ही क्यों छोटे-छोटे मतभेद बड़े तूफ़ान में बदल जाते हैं? तमिल फिल्म ‘आण पावं पोल्लाथथु’ (Aan Paavam Pollathathu) इसी सवाल का जवाब बड़े ही ईमानदारी और मज़ाकिया ढंग से देती है। यह फ़िल्म सिर्फ पर्फ़ेक्ट रोमांटिक कॉमेडी नहीं है, बल्कि उस मध्यवर्गीय भारतीय शादी की असलियत का आईना है, जहाँ प्यार के बावजूद ‘अहंकार’ दरवाज़ा खटखटाता रहता है।
Aan Paavam Pollathathu Movie Review
कहानी: ‘आदर्श’ विवाह जब ‘असंतुलित’ हो जाता है
मिलिए शिवा (रियो राज) से, जो आईटी की दुनिया में उलझा एक सीधा-साधा लड़का है, और शक्ति (मालविका मनोज) से, जो खुली सोच और आज़ादी की ज़बरदस्त समर्थक है। उनका प्रेम विवाह ‘समानता’ के वादों पर टिका था, लेकिन देखिए किस्मत! 400 दिन होते-होते, किचन में काम करने से लेकर दोस्तों के सामने अपनी राय रखने तक, हर बात पर दोनों के विचार ज़मीन-आसमान का फर्क दिखाने लगते हैं।
यह कहानी दिखाती है कि कैसे एक पति अनजाने में ‘पारंपरिक’ उम्मीदों में बंधा रहता है, और एक पत्नी, ‘फेमिनिज़्म’ के नाम पर, शायद रिश्ते की ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर देती है। उनकी निराशा और गुस्सा इतना बढ़ जाता है कि वे सीधे तलाक के कोर्ट में खड़े होते हैं।
और यहीं आता है सबसे बड़ा ट्विस्ट! उनके वकील – नारायणन और लक्ष्मी – कोई और नहीं, बल्कि ख़ुद तलाकशुदा एक्स-हस्बैंड-वाइफ हैं! कोर्टरूम तब सिर्फ बहस की जगह नहीं रह जाता, बल्कि एक हंसी से भरपूर, मगर दिल छू लेने वाला अखाड़ा बन जाता है, जहाँ मॉडर्न रिश्तों की परतें उधेड़ी जाती हैं।
यह फ़िल्म आपके दिल को क्यों छूएगी?
- 100% रिलेटिबल ड्रामा: इस फ़िल्म की सबसे ख़ास बात इसका ‘रिलेटेबिलिटी फ़ैक्टर’ है। जब शिवा अपनी दबी हुई भड़ास निकालता है या शक्ति अपने आत्म-सम्मान के लिए लड़ती है, तो आपको लगेगा, “अरे! यह तो हमारी कहानी है!” छोटे-छोटे रोज़मर्रा के लम्हे, जो मज़ाक में बदल जाते हैं, आपको हँसाएंगे और सोचने पर मजबूर करेंगे।
- कलाकारों का सहज प्रदर्शन: रियो राज (Rio Raj) ने उस पति की भूमिका में जान डाल दी है, जो प्यार तो करता है, लेकिन समझ नहीं पा रहा कि पत्नी को ‘खुश’ कैसे रखे। वहीं, मालविका ने एक आज़ाद ख़्याल, लेकिन रिश्ते को बचाने की कोशिश कर रही पत्नी का किरदार बखूबी निभाया है। उनकी केमिस्ट्री बिल्कुल आपकी और मेरी शादीशुदा ज़िंदगी जैसी लगती है-प्यारी, मगर उलझी हुई।
- किसी को बुरा न कहना: यह फ़िल्म किसी एक जेंडर को ‘सही’ या ‘गलत’ नहीं ठहराती। यह साफ तौर पर दिखाती है कि रिश्ते कम्युनिकेशन गैप और अनकही अपेक्षाओं की वजह से टूटते हैं। यह एक ज़रूरी सबक है।
थोड़ी-सी कड़वाहट
- कोर्टरूम में वकीलों की निजी ज़िंदगी पर ज़्यादा फोकस होने से, कभी-कभी हमें मुख्य जोड़े की कहानी से ध्यान भटकता हुआ महसूस होता है।
- क्लाइमेक्स में समाधान थोड़ा-सा ‘उपदेशात्मक’ (preachy) लग सकता है, जैसे कोई आपको क्लास ले रहा हो।
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हमारी निजी राय (Final Verdict)
‘आण पावं पोल्लाथथु’ एक मस्ट-वॉच फ़िल्म है। अगर आप शादीशुदा हैं, या होने वाले हैं, तो यह फ़िल्म आपके लिए एक मज़ेदार ‘रिलेशनशिप गाइड’ की तरह है। यह आपको हँसते-हँसते यह सिखा देगी कि प्यार से ज़्यादा ज़रूरी है ‘बातचीत’ और ‘समझौता’। इसे अपने पार्टनर के साथ देखें और हँसते-हँसते अपनी गलतियों को पहचानें।
रेटिंग: 3.5/5 यह सिर्फ़ एक मूवी नहीं है, बल्कि आपके घर की कहानी है, जिसे बड़े पर्दे पर उतार दिया गया है!
