Azad Bharath Movie Review – अक्सर जब हम भारत की आजादी का जिक्र करते हैं, तो कुछ गिने-चुने नाम ही हमारी जुबान पर आते हैं। लेकिन 2026 की शुरुआत में रिलीज हुई फिल्म ‘आज़ाद भारत’ हमें एक ऐसी वीरांगना से मिलवाती है, जिसका नाम इतिहास की किताबों ने शायद भुला दिया था। यह फिल्म ‘नीरा आर्या’ के साहस, उनके संघर्ष और देश के प्रति उनके उस जुनून की कहानी है, जो रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है।
Azad Bharath Movie Review
एक ऐसी दास्तां जो दिल को झकझोर दे
फिल्म की शुरुआत हमें उस दौर में ले जाती है जहाँ भारत की गलियों में इंकलाब की गूंज थी। कहानी की धुरी हैं नीरा आर्या (Roopa Iyer), जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ‘आज़ाद हिंद फौज’ की एक निडर सिपाही हैं। फिल्म का सबसे भावुक और चुनौतीपूर्ण हिस्सा वह है जहाँ नीरा को अपने निजी रिश्तों और राष्ट्रभक्ति के बीच चुनाव करना पड़ता है।
जब नीरा को यह पता चलता है कि उनके अपने पति, जो एक ब्रिटिश अधिकारी हैं, नेताजी की जान लेने की साजिश रच रहे हैं, तो वह जो फैसला लेती हैं वह उनके फौलादी इरादों को दर्शाता है। फिल्म उनके जेल के उन क्रूर दिनों को भी दिखाती है, जहाँ उन्हें असहनीय यातनाएं दी गईं, लेकिन उनका सिर नहीं झुका।
कलाकारों का समर्पण
- रूपा अय्यर: उन्होंने न केवल इस फिल्म का निर्देशन किया है, बल्कि नीरा आर्या के किरदार को जीया भी है। उनकी आंखों में वह दृढ़ता और दर्द साफ झलकता है जो एक स्वतंत्रता सेनानी ने महसूस किया होगा।
- श्रेयस तलपड़े: नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रूप में श्रेयस का चुनाव शुरुआत में थोड़ा चौंकाने वाला लग सकता है, लेकिन स्क्रीन पर आते ही उन्होंने अपनी सधी हुई अदाकारी से सबको चुप करा दिया है। उनकी ‘डायलॉग डिलीवरी’ में वही ओज है जो नेताजी के भाषणों में हुआ करता था।
क्यों देखें यह फिल्म?
यह फिल्म केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह उन गुमनाम नायकों को याद करने का एक जरिया है जिन्होंने हमारे आज के लिए अपना कल कुर्बान कर दिया। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर दृश्यों की गंभीरता को और गहरा बनाता है। हालाँकि, कहीं-कहीं फिल्म की गति थोड़ी धीमी पड़ती है, लेकिन कहानी की गहराई आपको अंत तक बांधे रखती है।
खूबियां:
- एक ऐसी महिला की सच्ची कहानी जिससे आज की पीढ़ी अनजान है।
- कलाकारों का दमदार और भावुक अभिनय।
- ब्रिटिश काल के उस कठिन समय का सजीव चित्रण।
कमी: फिल्म का पहला भाग थोड़ा विस्तार ले सकता था और कुछ दृश्यों में एडिटिंग और बेहतर की जा सकती थी।
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निष्कर्ष
‘आज़ाद भारत’ हर उस भारतीय को देखनी चाहिए जो अपनी जड़ों और अपनी आजादी की असली कीमत समझना चाहता है। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि आजादी सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि नीरा आर्या जैसे हज़ारों बलिदानों से मिली है।
