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Chaniya Toli Movie Review- गुजराती सिनेमा की वह ‘हेस्ट’ जिसे सिर्फ़ औरतों ने अंजाम दिया!

Chaniya Toli Movie Review – जब बात गुजराती सिनेमा की आती है, तो अक्सर उम्मीद होती है हल्के-फुल्के पारिवारिक मनोरंजन की। लेकिन ‘चणिया टोळी’ एक ऐसा सरप्राइज़ पैकेज है जिसने न सिर्फ़ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया है, बल्कि साबित कर दिया है कि हमारी कहानियों में कितना दम है। यह महज़ एक फ़िल्म नहीं, बल्कि गांव की उन ‘सातों नारियों’ की कहानी है, जो अन्याय और भ्रष्टाचार के सामने अपने ‘चणिया’ (घाघरे) कसकर खड़ी हो जाती हैं।

अगर आप मुझसे पूछें, तो यह फ़िल्म आपको एक पल के लिए भी बोर नहीं होने देती।

Chaniya Toli Movie Review

🎬 कहानी: ‘आइडिया’ टीचर का, ‘डेलीवरी’ चणिया टोळी की

फ़िल्म की कहानी गुजरात के एक सूखे, कर्ज़ग्रस्त गाँव के इर्द-गिर्द घूमती है। गाँव वाले भ्रष्ट सरकारी बैंक की साज़िशों में अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके हैं। ऐसे में एंट्री होती है यश सोनी की, जो एक चालाक, दुनियादारी जानने वाले स्कूल टीचर हैं। उन्हें लगता है कि इस समस्या का हल सिर्फ़ एक ही है: बैंक को लूटो!

लेकिन जब हिम्मत की बात आती है, तो गाँव के पुरुष हाथ खड़े कर देते हैं। और यहीं से कहानी असली मोड़ लेती है—’चणिया टोळी’ यानी गाँव की सात महिलाएं, जो अपने घरों की रसोई से निकलकर इस जोखिम भरी ‘हेस्ट’ को अंजाम देने का फ़ैसला करती हैं। सोचिए, एक तरफ़ प्रोफ़ेशनल चोरियों की योजना और दूसरी तरफ़ गाँव की भोली-भाली औरतें… बस इसी टकराव और तालमेल में फ़िल्म की जान बसी है।

⭐ परफॉरमेंस और हँसी के पल: तालियाँ बजनी तय हैं!

इस फ़िल्म की सबसे बड़ी जीत है इसकी कास्टिंग और कलाकारों का ज़बरदस्त तालमेल।

यश सोनी (Yash Soni): यश सोनी ने कमाल किया है! वह अपने चॉकलेटी बॉय वाली इमेज को छोड़कर एक साधारण, चतुर टीचर के रोल में पूरी तरह ढल गए हैं। उनका शांत और संयमित अभिनय, जो धीरे-धीरे शरारत में बदलता है, आपको बांधे रखता है।

नेत्री त्रिवेदी (Netri Trivedi): नेत्री त्रिवेदी ने अपने किरदार को यादगार बना दिया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग और विशेष शारीरिक भाषा (स्क्विंट आईज़) का इस्तेमाल इतना नेचुरल है कि हँसी रोक पाना मुश्किल है। उनकी और बाक़ी महिलाओं की केमिस्ट्री फ़िल्म का हाईलाइट है।

सहायक कलाकार: चेतन दैया और पूरी ‘चणिया टोळी’ (सात महिलाएं) की टीम ने कहानी को ज़मीनी स्वाद दिया है। उनकी मासूमियत, हिम्मत और देसी अंदाज़ ही इस ‘हेस्ट’ को इतना मज़ेदार बनाता है।

हर वो सीन, जहाँ ये महिलाएं अपनी ‘चोरी की ट्रेनिंग’ लेती हैं या जहाँ पुलिसवाले (ख़ासकर सेकंड हाफ़ में) अपनी ही बेवकूफ़ियों में उलझते हैं, आपको कुर्सी से उछाल देगा।

🤔 कहाँ लगा थोड़ा कमज़ोर?

देखिए, यह एक मसाला एंटरटेनर है। इसलिए अगर आप हॉलीवुड हेस्ट फ़िल्मों जैसा परफेक्ट लॉजिक या तेज-तर्रार स्क्रीनप्ले ढूंढ रहे हैं, तो थोड़ी निराशा हो सकती है।

फ़िल्म का शुरुआती हिस्सा थोड़ा धीमा है, क्योंकि किरदारों और बैकग्राउंड को सेट करने में समय लिया गया है। वहीं, कुछ गाने (जैसे कि एंड क्रेडिट्स के बाद वाला आइटम सॉन्ग) शायद कहानी के मूड से मेल नहीं खाते और अनावश्यक लगते हैं। यह फ़िल्म आपको सोचने के लिए नहीं, बल्कि हँसने और तालियाँ बजाने के लिए बनी है।

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🎯 क्यों देखनी चाहिए? (हमारा मानवीय दृष्टिकोण)

अगर आप थके हुए हैं और बस दो घंटे की शुद्ध, ज़बरदस्त देसी कॉमेडी चाहते हैं, तो ‘चणिया टोळी’ मिस मत कीजिए।

यह फ़िल्म आपको न सिर्फ़ हँसाएगी, बल्कि यह एहसास भी कराएगी कि हमारे समाज में जब महिलाएं किसी चीज़ को ठान लेती हैं, तो वह बड़े-बड़े पुरुषों के लिए भी चुनौती बन जाती है। यह एक मज़ेदार और साहसी कोशिश है, जिसे आप अपने पूरे परिवार के साथ एंजॉय कर सकते हैं।

हमारा फ़ैसला: यह गुजराती सिनेमा की तरफ़ से एक धमाकेदार एंट्री है। एक बार ज़रूर देखिए!

हमारा अंतिम स्कोर: ⭐⭐⭐ (3/5) – शुद्ध मनोरंजन, देसी स्टाइल!

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