De De Pyaar De 2 Movie Review: क्या यह उम्र का फासला इस बार भी हंसा पाया?

De De Pyaar De 2 Movie Review – हाय दोस्तों! मैं अभी-अभी ‘दे दे प्यार दे 2’ देखकर लौटा हूँ और मन में विचारों की खिचड़ी पक रही है। अगर आपको याद हो, 2019 में जब आशीष (अजय देवगन) और आयशा (रकुल प्रीत) ने हमें दिखाया था कि प्यार में उम्र सिर्फ एक नंबर है, तो कितनी फ्रेशनेस थी! इस सीक्वल में मेकर्स ने उसी जादू को दोहराने की कोशिश की है, लेकिन सवाल ये है, क्या वो कामयाब हुए? आइए, डिटेल में बात करते हैं।

De De Pyaar De 2 Movie Review

De De Pyaar De 2 Movie Review

कहानी में नया क्या है? इस बार ‘ससुराल’ का ड्रामा

पिछली बार सारा ड्रामा आशीष के घर और बच्चों के बीच था। इस बार, फोकस पूरी तरह से आयशा के परिवार पर शिफ्ट हो गया है। अब आशीष और आयशा, आयशा के ‘कूल’ और ‘मॉडर्न’ पेरेंट्स, राजजी (R. Madhavan) और अंजू (गौतमी कपूर) से मिलने चंडीगढ़ जाते हैं।

आप सोच रहे होंगे कि मॉडर्न पेरेंट्स हैं तो क्या दिक्कत होगी? दिक्कत ये है कि ‘मॉडर्न’ होने और 52 साल के दामाद को स्वीकार करने में ज़मीन-आसमान का फर्क होता है! राजजी (माधवन) को आशीष की उम्र का फासला कांटे की तरह चुभता है। यह जो उम्र का अंतर बनाम परिवार का प्यार का संघर्ष है, वही पूरी फिल्म की नींव है। यकीन मानिए, पेरेंट्स की आँखों में आने वाला कनफ्यूज़न और फिर उसे छिपाने की कोशिश, बहुत मज़ेदार है!

कौन चमका और कौन थोड़ा फीका रहा?

  • अजय देवगन (आशीष): अजय देवगन हमेशा की तरह शांत, थोड़ा बुझा-बुझा लेकिन जब ‘अंकल’ वाले मज़ाक पर रिएक्ट करते हैं, तो ज़बरदस्त लगते हैं। हाँ, मुझे लगा कि इमोशनल सीन में वो थोड़ा और खुल सकते थे।
  • रकुल प्रीत सिंह (आयशा): रकुल ने अपने किरदार में पूरी जान फूँक दी है। वह एक मॉडर्न, इंडिपेंडेंट लड़की के रूप में दमदार लगती हैं। उनकी एनर्जी अजय के धीमेपन को बैलेंस करती है।
  • आर. माधवन (राजजी – आयशा के पिता): फिल्म का हाई-वोल्टेज पॉइंट! माधवन ने एक ओवरप्रोटेक्टिव पिता की भूमिका को जिस ह्यूमर और टाइमिंग के साथ निभाया है, वो कमाल है। अजय के साथ उनकी तू-तू, मैं-मैं आपको हँसा-हँसाकर लोटपोट कर देगी। वह इस फिल्म के असली सरप्राइज पैकेज हैं।

क्या देखकर मज़ा आया और कहाँ मन उदास हुआ?

जो बातें दिल को छू गईं:

  1. डायलॉग्स: लव रंजन स्कूल के डायलॉग्स तेज़, चुटीले और आज के समय से जुड़े हुए हैं। कुछ वन-लाइनर्स इतने शानदार हैं कि आप तालियाँ बजाएंगे।
  2. माधवन बनाम अजय: इन दोनों दिग्गजों की जुगलबंदी, खासकर जब वे एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं, देखने लायक है। यह प्योर कॉमेडी गोल्ड है!
  3. म्यूजिक: गाने, खासकर पार्टी एंथम्स, बहुत कैची (आकर्षक) हैं।

जहाँ मुझे लगा कि गाड़ी पटरी से उतर गई:

  1. इंटरवल के बाद: कहानी कहीं-कहीं खींची हुई महसूस होती है। मेकर्स ने जबरदस्ती इमोशनल एंगल डालने की कोशिश की, जिससे कॉमेडी का फ्लो टूट गया।
  2. रिपीटेशन: कुछ कॉमेडी के मोमेंट्स पहली फिल्म जैसे लगे, और लगा कि यह नयापन थोड़ा कम है।

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तो, क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए?

अगर आप अपने वीकेंड पर बिना दिमाग लगाए बस ज़ोर से हँसना चाहते हैं, तो बिल्कुल देखिए!

यह एक परफेक्ट रोम-कॉम है जो आपको गुदगुदाएगी। यह बात सही है कि यह पहली फिल्म जितनी यादगार नहीं है, लेकिन आर. माधवन की परफॉर्मेंस और अजय-रकुल की केमिस्ट्री इसे देखने लायक बनाती है। इसे एक फ़ैमिली-फ्रेंडली एंटरटेनर कह सकते हैं, जहाँ रिश्तों की बात भी है और हँसी-मज़ाक भी।

मेरी तरफ से रेटिंग: 3/5 (एक स्टार माधवन की शानदार एंट्री के लिए एक्स्ट्रा!)

आप क्या सोचते हैं?

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