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Dude Movie Review: दोस्ती, प्यार, और ये कॉम्प्लिकेटेड रिश्ते!

Dude Movie Review – आजकल की फ़िल्मों में जहाँ सब कुछ या तो सुपर-रोमांटिक होता है या पूरी तरह से डार्क, वहाँ डायरेक्टर कीर्तिस्वरन की पहली फ़िल्म ‘ड्यूड’ एक ताज़ी हवा के झोंके जैसी लगती है। यह फ़िल्म आपको हँसाएगी, थोड़ा इमोशनल भी करेगी, और जाते-जाते एक ज़रूरी सवाल छोड़ जाएगी: प्यार और दोस्ती की लाइन खींचना इतना मुश्किल क्यों है?

Dude Movie Review

कहानी में क्या ख़ास है, और क्यों देखें?

मिलिए अग़न (Pradeep Ranganathan) से, जो किसी भी कॉलेज जाने वाले लड़के जैसा है – थोड़ा कन्फ़्यूज़्ड, लेकिन दिल का सच्चा। वह अपनी कज़िन कुरल (ममिता बैजू) के साथ मिलकर ‘सरप्राइज़ ड्यूड’ नाम का एक इवेंट-प्लानिंग बिज़नेस चलाता है। उनकी बॉन्डिंग इतनी मज़ेदार है कि आपको अपने कज़िन या बेस्ट फ्रेंड की याद आ जाएगी। सब कुछ नॉर्मल था, जब तक कुरल, अग़न को शादी के लिए प्रपोज़ नहीं कर देती!

अग़न तो पहले के ब्रेकअप से अभी तक उबर नहीं पाया है, इसलिए वह ना कह देता है। यहीं से शुरू होता है असली ड्रामा! जब कुरल किसी और से प्यार कर बैठती है, तो सिचुएशन ऐसी बनती है कि अग़न और कुरल को शादी करनी पड़ती है।

अब कहानी यह है कि अग़न कैसे ‘बड़ा दिल’ दिखाता है और अपनी पत्नी कुरल और उसके बॉयफ्रेंड को मिलाने की कोशिश करता है। और इस पूरे ‘मिशन’ में कुरल के पावरफुल नेता पिता (आर. सरथकुमार) की एंट्री, जो अपने सिद्धांतों के पक्के हैं, क्या बवाल मचाती है, यही देखना असली मज़ा है।

हमारी नज़र में, फ़िल्म की जान:

पर थोड़ी-सी खटकने वाली बातें:

  1. सेकंड हाफ़, थोड़ा ढीला: इंटरवल तक फ़िल्म एक ‘रॉकेट’ की तरह भागती है, लेकिन बाद में थोड़ी इमोशनल और उपदेशात्मक (Preachy) हो जाती है। अग़न का त्याग कुछ दर्शकों को थोड़ा ‘ओवर-द-टॉप’ लग सकता है।
  2. कन्फ़्यूज़्ड टोन: डायरेक्टर ने कॉमेडी और गंभीर ड्रामा को मिक्स करने की कोशिश की है, लेकिन कभी-कभी ये ट्रांज़िशन (बदलाव) अचानक लगते हैं, जिससे फ़िल्म का मूड थोड़ा डाँवाडोल हो जाता है।

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आख़िरी फ़ैसला: क्या आपको ‘ड्यूड’ देखना चाहिए?

अगर आप एक ऐसी फ़िल्म देखना चाहते हैं जो हल्की-फुल्की कॉमेडी से शुरू हो, दोस्ती के मज़ेदार पल दिखाए, और अचानक आपको ‘लाइफ़ के सीरियस साइड’ से भी मिला दे, तो ‘ड्यूड’ आपके लिए है। यह परफेक्ट नहीं है, लेकिन ईमानदार है।

यह एक ऐसी फ़िल्म है जिसे आप अपने दोस्तों के साथ या अपनी फै़मिली के साथ देख सकते हैं। यह आपको सोचने पर मजबूर करेगी कि “सच्चे प्यार और सच्चे रिश्ते की आख़िरी सीमा कहाँ है?”

हमारी रेटिंग: 3.5/5

अगर आप प्रदीप रंगनाथन के फ़ैन हैं, ताज़ी और हटकर कहानियाँ पसंद करते हैं, या बस वीकेंड पर कुछ मज़ेदार और थोड़ा सा ‘डिफरेंट’ देखना चाहते हैं।

 

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