Ek Deewane Ki Deewaniyat – नाम सुनकर ही लगता है कि कहानी बेपनाह जुनून से भरी होगी। हर्षवर्धन राणे और सोनम बाजवा की ये फिल्म, डायरेक्टर मिलाप जावेरी की सिग्नेचर स्टाइल है: भरपूर ड्रामा, भारी डायलॉग्स और दिल को छू लेने वाले गाने। लेकिन सवाल ये है कि क्या यह जुनून, सिनेमा के परदे पर आग लगा पाता है या सिर्फ़ धुआं बनकर रह जाता है?
Ek Deewane Ki Deewaniyat Movie Review
कहानी की धड़कन: प्यार का वो रूप जो डराता भी है
यह कहानी है विक्रम आदित्य भोसले (Harshvardhan Rane) की। एक ऐसा युवा नेता जिसकी हर बात में ज़िद झलकती है। उसकी ज़िंदगी में एंट्री होती है अदा रंधावा (सोनम बाजवा) की, एक मशहूर एक्ट्रेस जो आज़ाद ख्यालों वाली है। विक्रम को अदा से पहली नज़र में प्यार होता है, लेकिन जल्द ही यह मोहब्बत, सनक (Obsession) में बदल जाती है।
विक्रम का जुनून इतना गहरा है कि अदा उससे नफरत करने लगती है। कहानी में मोड़ तब आता है जब अदा, तंग आकर, खुलेआम ऐलान कर देती है कि जो विक्रम को मारेगा, वह उसके साथ… (खैर, आगे का ड्रामा आपको थिएटर में देखना होगा)। इस ऐलान के बाद, प्यार और नफ़रत की यह लड़ाई, इंतकाम और तबाही के ट्रैक पर दौड़ पड़ती है।
क्या चीज़ आपको दीवाना बनाएगी?
- संगीत (Soulful Music): अगर आप 90s के मेलोडी और इंटेंस रोमांटिक गाने मिस करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है। फिल्म के गाने, ख़ासकर टाइटल ट्रैक, दिल को सीधा छूते हैं और कहानी के इमोशनल मोमेंट्स को दमदार बनाते हैं। सच कहूँ तो, संगीत ही इस फिल्म की जान है।
- हर्षवर्धन का जुनूनी अंदाज़: हर्षवर्धन राणे ने विक्रम के रोल में अपनी पूरी जान डाल दी है। उनकी आँखों में जुनून, दर्द और गुस्सा साफ़ दिखता है। एक जुनूनी आशिक की भूमिका उन्होंने शिद्दत से निभाई है।
- सीटीमार डायलॉग्स: मिलाप जावेरी की पहचान उनके डायलॉग्स होते हैं। इस फिल्म में भी ऐसे कई भारी और ड्रामैटिक संवाद हैं, जिन पर सिंगल स्क्रीन ऑडियंस ज़रूर ताली बजाएगी। ये डायलॉग्स कहानी के नाटकीय पलों को और ऊँचा उठाते हैं।
वो पहलू जो दिल दुखाते हैं
- अति-नाटकीयता (Overdone Drama): फिल्म कई जगहों पर हद से ज़्यादा ड्रामैटिक हो जाती है। आज के ज़माने में, जब दर्शक रियलिस्टिक सिनेमा पसंद कर रहे हैं, तो कुछ सीन अविश्वसनीय (illogical) और खींचे हुए लगते हैं। ऐसा लगता है जैसे आप कोई पुराना, लाउड टीवी सीरियल देख रहे हों।
- पुराना कॉन्सेप्ट: एकतरफ़ा, जुनूनी प्यार का यह कॉन्सेप्ट अब काफी घिस चुका है। कहानी का ट्रीटमेंट कुछ नयापन नहीं दे पाता और यह ‘ओल्ड-स्कूल मसाला मूवी’ की ज़मीन पर ही टिकी रहती है।
- कमज़ोर सेकंड हाफ: जहाँ पहला हाफ एक अच्छा बेस बनाता है, वहीं इंटरवल के बाद कहानी धीमी पड़ जाती है और बार-बार दोहराई हुई लगती है।
कलाकारों का काम
हर्षवर्धन राणे ने ‘दीवाना’ बनकर पूरा शो अपने नाम कर लिया है। उनकी परफॉर्मेंस बेहतरीन है। सोनम बाजवा खूबसूरत दिखी हैं और उन्होंने अपने मजबूत, आज़ाद ख्यालों वाले किरदार को अच्छे से निभाया है। यह सिर्फ़ एक कमज़ोर हीरोइन नहीं है, बल्कि वह भी जुनून का जवाब जुनून से देती है। हालांकि, शाद रंधावा और सचिन खेडेकर जैसे अच्छे कलाकारों को कहानी में और जगह मिलनी चाहिए थी।
Also read this – Thamma Movie Review
हमारा फैसला
‘एक दीवाने की दीवानियत’ एक इंटेंस रोमांटिक ड्रामा है। यह उन लोगों को बहुत पसंद आएगी जो 90 के दशक की ‘लाउड’ लव स्टोरीज को, उसके सारे ड्रामे और भावनाओं के साथ, मिस करते हैं।
अगर आप एक दिल को छू लेने वाले संगीत और जुनूनी परफॉर्मेंस के लिए तैयार हैं, और कुछ अतार्किक ड्रामे को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक अच्छा वन-टाइम वॉच हो सकती है।
रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5 स्टार)
क्या आप भी मानते हैं कि कुछ प्रेम कहानियाँ जुनून की हद तक पहुँचकर ही यादगार बनती हैं?
