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K-Ramp Movie Review: क्या किरण की एनर्जी फ़िल्म को बचा पाई?

K-Ramp Movie Review – किरण अब्बावरम की नई फ़िल्म ‘के-रैंप’ सिनेमाघरों में आ चुकी है और यह ख़ास तौर पर युवाओं को टारगेट करती दिखती है। यह एक ऐसी फ़िल्म है जो आपको हँसाने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन क्या यह कोशिश सफल होती है? आइए, एक दोस्त की तरह इसकी बातें करते हैं।

K-Ramp Movie Review

कहानी: एक बिगड़े लड़के का नया ठिकाना

कल्पना कीजिए, एक ऐसा लड़का जिसे दुनिया की कोई फ़िक्र नहीं, बस मौज-मस्ती और पार्टी ही उसका जीवन है। यह है हमारा हीरो, कुमार (Kiran Abbavaram)। उसके पिता (साई कुमार) परेशान होकर उसे सुधारने के लिए केरल भेजते हैं।

केरल पहुँचकर कुमार की मुलाक़ात मर्सी जॉय (युक्ति थरेजा) से होती है। मर्सी सादगी और मासूमियत की मूरत है, लेकिन उसके दिल में एक गहरा राज़ छिपा है वह पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से जूझ रही है। कुमार, जो हमेशा लापरवाह रहा है, उसे लगता है कि वह मर्सी को “बचा” सकता है, और यहीं से उसकी ज़िंदगी का असली ‘रैंप’ शुरू होता है, जो उसे ज़िम्मेदारी और जज़्बात सिखाता है।

जो दिल छू गया (The Good Stuff)

कहाँ रह गई कमी? (The Hiccups)

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हमारा अंतिम शब्द

अगर आप दिमाग को आराम देकर मनोरंजन करना चाहते हैं, तो ‘के-रैंप’ आपको निराश नहीं करेगी। यह एक ‘टाइमपास एंटरटेनर’ है जिसमें हीरो की मेहनत साफ़ दिखती है। यह फ़िल्म फ़ैमिली के साथ बैठकर हल्की-फुल्की हँसी-मज़ाक का मज़ा लेने के लिए अच्छी है। बस यह याद रखें कि आप कोई गहन सिनेमा देखने नहीं जा रहे हैं, बल्कि एक एनर्जेटिक मसाला पैकेज देखने जा रहे हैं।

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