Lokah Chapter One Chandra Movie Review: मार्वल की फ़िल्में भूल जाइए, असली जादू यहाँ है!

Lokah Chapter One Chandra Movie Review – देखिए, इंडियन सिनेमा में जब भी कोई कहता है कि ‘हम सुपर हीरो फिल्म बना रहे हैं,’ तो मन में कहीं न कहीं डर बैठ जाता है। बड़े-बड़े वादे, भारी-भरकम बजट, और अंत में… सिर्फ़ कमजोर VFX और खोखली कहानी। लेकिन, मैं आपको बता दूँ, मलयालम सिनेमा की यह फ़िल्म ‘लोका चैप्टर वन: चंद्रा’ इन सारे ‘ट्रेडिशनल’ सुपरहीरो फॉर्मूलों को उठाकर कूड़ेदान में फेंक देती है! यकीन मानिए, दुलकर सलमान के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म, मात्र ₹30 करोड़ के बजट में, जो सिनेमैटिक एक्सपीरियंस देती है, वह लाजवाब है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह इंडियन सुपरहीरो सिनेमा के लिए एक गेम चेंजर है।

Lokah Chapter One Chandra Movie Review

Lokah Chapter One Chandra Movie Review

कहानी की ‘जादुई’ शुरुआत: यक्षी का मॉडर्न अवतार

फिल्म की हीरोइन है चंद्रा (Kalyani Priyadarshan)। वो रात में बैंगलोर के एक कैफे में काम करती है और उसका एक गहरा राज है। चंद्रा असल में केरल की लोककथाओं की एक मशहूर यक्षी (एक शक्तिशाली प्रकृति आत्मा) है, जिसे एक खास मकसद से बुलाया गया है। कहानी तब मोड़ लेती है जब चंद्रा को अपने पड़ोसी, एक प्यारे से, थोड़े अक्लमंद, थोड़े बेवकूफ सनी (नास्लेन के. गफूर) और शहर के खूंखार क्रिमिनल सिंडिकेट के बीच फंसना पड़ता है।

सबसे बेहतरीन बात यह है कि यह फिल्म कल्लीयंकाट्टू नीली जैसी देसी लोककथा को उठाती है और उसे आज के मॉडर्न, अर्बन फैंटेसी के कैनवास पर पेश करती है। यह सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं है, यह अपनी जड़ों से जुड़ी हुई सुपरहीरो कहानी है।

किन चीज़ों ने मेरा दिल जीता? (असली ‘डील’ कहाँ है?)

1. स्क्रिप्टिंग है असली हीरो (Writer is the Boss!)

नि:र्देशक डोमिनिक अरुण ने साबित कर दिया है कि कहानी और कैरेक्टर सबसे ज़रूरी हैं। फिल्म में सिर्फ VFX और स्लो-मोशन शॉट्स की भरमार नहीं है। हर चीज़ कहानी के मूड और कैरेक्टर की भावना को सपोर्ट करती है। चंद्रा की बैक-स्टोरी जिस तरह से रिवील की जाती है, वह इस जॉनर के लिए एक स्टैंडर्ड है।

2. विज़ुअल्स जो ‘झटका’ देते हैं

ईमानदारी से कहूँ तो, 30 करोड़ के बजट में ऐसी सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन क्वालिटी देखना हैरान कर देता है। सिनेमैटोग्राफर निमिश रवि ने कमाल का काम किया है। फिल्म की लाइटिंग और कलर टोन इसे एक कॉमिक बुक का लुक देते हैं, जो आपको शुरू से अंत तक बांधे रखता है। एक्शन सीक्वेंस तेज, क्रूर, और प्रभावी हैं, बिल्कुल किसी इंटरनेशनल सुपरहीरो फिल्म की तरह।

3. कल्याणी प्रियदर्शन का ‘चंद्रा’ रूप

कल्याणी प्रियदर्शन ने इस रोल को पूरी ईमानदारी से निभाया है। एक तरफ उनकी आँखों में एक सदियों पुराना दर्द दिखता है, तो दूसरी तरफ उनकी एक्शन में घातक शक्ति। वह अपने किरदार को विनम्र और खतरनाक दोनों ही तरह से बैलेंस करती हैं, बिना ओवर-एक्टिंग के।

4. देसी टच और बीजीएम का जादू

जेक्स बेजॉय का बैकग्राउंड म्यूज़िक (BGM) फिल्म की जान है। यह हर सीन को एक यूनीक वाइब देता है। फिल्म में मल्टीलिंगुअल डायलॉग्स और क्षेत्रीय लोककथाओं का मिश्रण इसे एक प्रामाणिक पैन-इंडिया फील देता है।

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कहाँ लगा कि थोड़ी और मेहनत की जा सकती थी?

फिल्म का पहला हाफ इतना कसा हुआ है कि इंटरवल आते ही आप उछल पड़ते हैं। लेकिन, दूसरा हाफ थोड़ा जल्दबाजी में लगता है। यहाँ कहानी के नए कैरेक्टर्स और लव स्टोरी पर अचानक ज़्यादा ज़ोर दिया गया है, जिससे मुख्य प्लॉट की रफ्तार थोड़ी धीमी होती है। कुछ कैमियो रोल्स की बैकग्राउंड पर थोड़ी और रोशनी डाली जा सकती थी, लेकिन यह एक यूनिवर्स की शुरुआत है, इसलिए उम्मीद है कि आगे के चैप्टर्स में ये कमियां दूर होंगी।

अंतिम फैसला

यह फिल्म सिर्फ एक सुपरहीरो मूवी नहीं है, यह भारतीय सिनेमा के भविष्य की एक झलक है। यह बोल्ड है, विज़ुअली स्टनिंग है, और सबसे बड़ी बात, बुद्धिमानी से लिखी गई है। अगर आप सिनेमाई भव्यता और एक मौलिक कहानी की तलाश में हैं, तो ‘लोका चैप्टर वन: चंद्रा’ आपके लिए है।

हमारी सलाह: इसे बड़े पर्दे पर देखें या कम से कम अच्छी क्वालिटी की स्क्रीन पर, ताकि इसके विज़ुअल्स का पूरा मज़ा ले सकें।क्या आप तैयार हैं इस नए ‘लोका’ (संसार) का हिस्सा बनने के लिए?

रेटिंग: 4/5 स्टार्स

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