Saayavanam Movie Review – अक्सर सिनेमा में हम चमक-धमक और शोर-शराबा देखते हैं, लेकिन कभी-कभी कोई ऐसी फिल्म आती है जो खामोशी से अपनी बात कह जाती है। 2025 में आई तमिल फिल्म ‘सायवनम’ (Saayavanam) कुछ ऐसी ही है। यह फिल्म हमें एक ऐसे सफर पर ले जाती है जहाँ डर है, इंतज़ार है और अंत में एक जबरदस्त आत्म-बोध है।

Saayavanam Movie Review
एक अधूरा वादा और लम्बा इंतज़ार
फिल्म की शुरुआत हमें सीता (देवानंदा शाजीलाल) के जीवन से रूबरू कराती है। पहाड़ों की ठंडी वादियों के बीच एक छोटा सा घर, जो दिखने में सुंदर है पर असल में सीता के लिए एक कैद जैसा बन गया है। उसका पति मुथु उसे वहाँ छोड़कर चला गया है। वह वादा करता है कि लौटेगा, पर दिन, महीने और साल बीत जाते हैं, मुथु नहीं आता।
सीता का यह अकेलापन आपको महसूस होता है। फिल्म का पहला हिस्सा बहुत ही धीमी गति से चलता है, जो शायद दर्शकों को यह समझाने के लिए है कि ‘अकेले इंतज़ार करना कैसा होता है।’
जब मदद के पीछे छिपा हो लालच
कहानी में नया मोड़ तब आता है जब संतोष (संतोष दामोदरन) की एंट्री होती है। वह सीता की मदद करने के बहाने करीब आता है। यहाँ निर्देशक अनिल कुमार ने बहुत ही बारीकी से दिखाया है कि कैसे समाज में एक अकेली महिला को ‘शिकार’ समझा जाता है। फिल्म एक थ्रिलर का रूप ले लेती है जब सीता को एहसास होता है कि वह जिन पर भरोसा कर रही है, वही उसके सबसे बड़े दुश्मन हैं।
अभिनय जिसने जान फूंक दी
इस फिल्म की असली ताकत देवानंदा शाजीलाल हैं। उन्होंने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है जो अंदर से टूट चुकी है, लेकिन फिर भी अपनी गरिमा नहीं खोती। उनके चेहरे के भाव बिना कुछ बोले बहुत कुछ कह जाते हैं। वहीं विलेन के रूप में संतोष दामोदरन ने अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय किया है; उन्हें देखकर आपको वाकई नफरत होने लगती है, जो एक कलाकार की जीत है।
क्या खास है और कहाँ कमी रह गई?
- खूबसूरत फिल्मांकन: फिल्म को जिस तरह शूट किया गया है, वह किसी पेंटिंग जैसा लगता है। पहाड़ों की धुंध और जंगल का सन्नाटा कहानी के सस्पेंस को कई गुना बढ़ा देता है।
- मजबूत संदेश: फिल्म यह कड़वा सच दिखाती है कि एक महिला का सबसे बड़ा रक्षक वह खुद होती है।
- कमज़ोर कड़ी: फिल्म की रफ्तार काफी धीमी है। आज के समय में जहाँ लोग तेज तर्रार फिल्में पसंद करते हैं, वहाँ कुछ दर्शकों को यह थोड़ी उबाऊ लग सकती है। साथ ही, इसके बोल्ड दृश्यों के कारण इसे केवल वयस्क (Adults) ही देख सकते हैं।
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मेरी राय: क्यों देखें?
‘सायवनम’ हर किसी के लिए नहीं है। अगर आप ‘मसाला’ फिल्मों के शौकीन हैं, तो शायद आप निराश हों। लेकिन अगर आप कलात्मक सिनेमा, गहरे अर्थ वाली कहानियाँ और सस्पेंस पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके दिल को छू लेगी। यह फिल्म हमें सिखाती है कि भरोसा सोच-समझकर करना चाहिए और अपनी लड़ाई खुद लड़नी पड़ती है।
मेरी रेटिंग: 3.5/5