The Family Man Season 3 Review – क्या आप भी उन लाखों लोगों में शामिल हैं जो चार सालों से सिर्फ एक सवाल पूछ रहे थे? “तस्वीर खींचेगा या नहीं?”
तो लीजिए, मनोज बाजपेयी के रूप में हमारा पसंदीदा ‘लो-एफर्ट’ एजेंट श्रीकांत तिवारी आखिरकार प्राइम वीडियो पर लौट आया है। लेकिन इस बार की कहानी सिर्फ देश को बचाने तक सीमित नहीं है, क्योंकि खतरा श्रीकांत के घर के दरवाज़े तक आ पहुँचा है! आइए, एक फैन के उत्साह और एक आलोचक की नज़र से देखते हैं कि यह तीसरा सीज़न कितना ‘धमाकेदार’ रहा।

The Family Man Season 3 Review
समीक्षा की शुरुआत: इस बार की कहानी में नया क्या है?
पिछला सीज़न जहाँ साउथ इंडिया के पॉलिटिकल थ्रिल पर खत्म हुआ था, वहीं यह कहानी सीधे हमें भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की जटिल और संवेदनशील दुनिया में ले जाती है। चीन और ड्रग्स कार्टेल का एक खतरनाक गठबंधन भारत के खिलाफ ‘प्रोजेक्ट सहकार’ नाम का बड़ा खेल रच रहा है।
लेकिन ‘द फैमिली मैन’ की खासियत रही है, उसकी पारिवारिक उलझनें। इस बार, विलेन केवल देश का दुश्मन नहीं है वह एक ‘फैमिली मैन’ भी है, जिसका नाम है रुक्मा (Jaideep Ahlawat), जो बदले की आग में श्रीकांत के पीछे पड़ा है। और जब किसी जासूस की पर्सनल लाइफ दांव पर लगती है, तो मसाला दोगुना हो जाता है! श्रीकांत को अपनी बीवी (सुचि), बेटी (धृति), और बेटे (अयान) को लेकर भागना पड़ता है।
क्या इसे ‘ज़रूर देखें’ बनाती है? (Highlights)
- दो दिग्गजों का आमना-सामना: इस सीज़न का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है मनोज बाजपेयी और जयदीप अहलावत का स्क्रीन पर टकराना। जहाँ मनोज अपने सिग्नेचर ‘मिडिल क्लास’ ह्यूमर और जासूसी की गंभीरता को बड़ी सहजता से मिलाते हैं, वहीं जयदीप अहलावत का शांत, लेकिन डरावना अंदाज़ एक नए तरह का विलेन पेश करता है। उनकी आँखों में गुस्सा और बदले की भावना दिखती है यह सिर्फ अभिनय नहीं, जादू है!
- एक्शन जो ‘रियल’ लगता है: सीरीज का एक्शन बिल्कुल फिल्मी नहीं, बल्कि गंदगी से सना हुआ, तनावपूर्ण और असली लगता है। पीछा करने के सीन (Chase Sequences) और अचानक के हमले (Sudden Attacks) आपको अपनी सीट से चिपके रहने पर मजबूर कर देंगे।
- सुचि और बच्चों का बढ़ता रोल: शुक्र है! इस बार सुचि सिर्फ बहस करने वाली पत्नी नहीं है। उनका किरदार एक मुश्किल माँ और श्रीकांत की साथी के रूप में निखर कर आया है। बच्चों का डर और उनकी हिम्मत भी कहानी को एक भावनात्मक सहारा देती है।
- राज और डीके का ‘ट्रेडमार्क टच’: निर्देशक जोड़ी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे भारतीय ओटीटी के ‘बाप’ क्यों हैं। थ्रिल, ह्यूमर और फैमिली ड्रामा का परफेक्ट संतुलन ही इस शो को इतना खास बनाता है।
क्या यह कहीं कमज़ोर पड़ी? (Points of Concern)
- छोटे एपिसोड्स की मार: सिर्फ 7 एपिसोड्स के कारण, कहानी कई बार ज़रूरत से ज़्यादा तेज़ भागती है। ऐसा लगता है जैसे हमें कई ज़रूरी डिटेल्स या किरदारों के विकास (Character Development) से वंचित रखा गया हो।
- क्लाइमेक्स में फिर इंतज़ार: पिछली बार की तरह, इस बार भी सीज़न का अंत एक बड़े सस्पेंस नोट पर होता है। यह चौथे सीज़न की ओर इशारा तो करता है, लेकिन तुरंत जवाब चाहने वाले दर्शकों को यह निराश कर सकता है।
- ‘टूल्स’ की कमी: T.A.S.C. की टीम (जे.के. और अन्य) का रोल इस बार थोड़ा कमज़ोर महसूस होता है, जो पिछले सीज़नों में कहानी में मज़ा और हल्कापन लाते थे।
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अंतिम राय: क्या आपको इसे देखना चाहिए?
अगर आप एक शानदार अभिनय, देश से जुड़ी हुई तेज़-तर्रार कहानी और पारिवारिक ड्रामा का मिश्रण चाहते हैं, तो ‘द फैमिली मैन सीज़न 3’ आपके लिए ही बना है।
यह केवल एक वेब सीरीज़ नहीं है यह एक इमोशनल रोलरकोस्टर है जहाँ आपको हँसी भी आएगी, डर भी लगेगा और आप श्रीकांत के लिए तालियाँ भी बजाएँगे।
इसे देखने में एक पल भी मत गंवाइए!
हमारी तरफ से रेटिंग: 4.5/5 (केवल क्लाइमेक्स के लिए 0.5 काटा गया है!)