KalamKaval Movie Review – आज के दौर में जहाँ सिनेमा केवल शोर-शराबे और बड़े बजट के एक्शन तक सिमटता जा रहा है, वहीं मलयालम फिल्म इंडस्ट्री एक बार फिर अपनी कहानी कहने की कला से हमारा दिल जीत रही है। दिग्गज अभिनेता ममूटी और विनायकन की नई फिल्म ‘कलमकवल’ एक ऐसी ही फिल्म है जो आपको कुर्सी से बांधे रखेगी, लेकिन यह आपके दिल में एक अजीब सी बेचैनी भी छोड़ जाएगी।

KalamKaval Movie Review
एक डरावनी सच्चाई से प्रेरित कहानी
‘कलमकवल’ की जड़ें वास्तविक जीवन की रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाओं में छिपी हैं। फिल्म हमें केरल के एक शांत दिखने वाले गांव की गलियों में ले जाती है, जहाँ एक सांप्रदायिक तनाव की जांच शुरू होती है। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस अधिकारी जयकृष्णन (विनायकन) गहराई में उतरते हैं, मामला दंगों से बदलकर सीरियल किलिंग के एक ऐसे खौफनाक जाल में तब्दील हो जाता है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
फिल्म का मुख्य आकर्षण ‘स्टेनली दास’ (Mammootty) का किरदार है। वह एक पुलिस वाला है, लेकिन उसके भीतर एक ऐसा अंधेरा छिपा है जो उसे एक साधारण इंसान से एक शिकारी बना देता है।
अभिनय का महाकुंभ
इस फिल्म को देखने की सबसे बड़ी वजह इसके कलाकार हैं।
- ममूटी का जादू: ममूटी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उम्र उनके लिए सिर्फ एक नंबर है। स्टेनली दास के रूप में उनकी खामोशी और उनके चेहरे के सूक्ष्म भाव (Expressions) किसी भी डरावने डायलॉग से ज्यादा प्रभावशाली हैं। वह आपको डराते भी हैं और हैरान भी करते हैं।
- विनायकन की सहजता: दूसरी तरफ विनायकन हैं, जिन्होंने एक जांच अधिकारी की भूमिका को बहुत ही यथार्थवादी रखा है। उनका अभिनय इतना स्वाभाविक है कि आपको लगता ही नहीं कि आप कोई फिल्म देख रहे हैं। ममूटी और विनायकन के बीच का टकराव फिल्म का असली ‘हाई-पॉइंट’ है।
निर्देशक की दृष्टि और संगीत
नवोदित निर्देशक जितिन के. जोस ने फिल्म को एक ‘स्लो-बर्न थ्रिलर’ के रूप में बुना है। फिल्म जल्दबाजी नहीं करती, बल्कि धीरे-धीरे अपना माहौल बनाती है।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इसकी रीढ़ की हड्डी है। सस्पेंस वाले दृश्यों में संगीत का इस्तेमाल आपको मानसिक रूप से कहानी का हिस्सा बना देता है। वहीं, केरल की हरियाली और वहां के माहौल को सिनेमेटोग्राफी के जरिए जिस तरह पर्दे पर उतारा गया है, वह काबिले तारीफ है।
आपको यह फिल्म क्यों देखनी चाहिए?
यह फिल्म उन दर्शकों के लिए है जो:
- ममूटी के ‘ग्रे शेड’ वाले किरदारों के दीवाने हैं।
- जिन्हें ‘साइकोलॉजिकल थ्रिलर’ पसंद हैं।
- जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक अच्छी कहानी की तलाश में रहते हैं।
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हमारा निष्कर्ष
‘कलमकवल’ कोई सामान्य फिल्म नहीं है; यह बुराई के उस चेहरे की पड़ताल है जो हमारे बीच ही छिपा होता है। हालांकि फिल्म की रफ्तार बीच में थोड़ी धीमी पड़ती है, लेकिन फिल्म का क्लाइमेक्स और ममूटी का अभिनय उन सभी छोटी कमियों को ढक लेता है।
अंतिम रेटिंग: 3.5/5