Mass Jathara Movie Review – जब भी रवि तेजा की कोई नई फिल्म रिलीज़ होती है, तो सिनेमाघरों में एक अलग ही तरह का उत्साह छा जाता है फैंस को एक ज़ोरदार ‘जथारा’ (उत्सव) का इंतज़ार रहता है। ‘मास जथारा’ नाम भी कुछ ऐसा ही वादा करता है, लेकिन क्या डायरेक्टर भानु भोगवरपू की यह डेब्यू फिल्म, अपने स्टार की पुरानी चमक को फिर से वापस ला पाई है?

Mass Jathara Movie Review
कहानी: वही पुरानी किताब, नए कवर में
फिल्म की कहानी बहुत सीधी-सादी है, इतनी सीधी कि आप इसे देखकर तुरंत समझ जाएंगे कि आगे क्या होने वाला है। लक्ष्मण भेरी (Ravi Teja) एक रेलवे पुलिस वाला है, जो अपनी ड्यूटी को लेकर भले ही ईमानदार हो, पर ज़िन्दगी में थोड़ा ‘कमज़ोर’ माना जाता है। जब उसका तबादला एक ऐसे सुनसान इलाके में होता है जहाँ गांजा माफिया का राज है, तो उसकी असली जंग शुरू होती है।
विलेन शिवुडू (नवीन चंद्रा) है, जो अपने इलाके का बेताज बादशाह है। बस, फिर क्या? एक नियमबद्ध पुलिसिया एक्शन ड्रामा शुरू हो जाता है।
- हमारा पहला विचार: कहानी में नयापन शून्य है। ऐसा महसूस होता है जैसे हमने यह प्लॉट रवि तेजा की पिछली दो-तीन फिल्मों में देख लिया हो।
सकारात्मक पहलू: जहाँ फिल्म साँस लेती है
- रवि तेजा का ‘मास’ अंदाज़: रवि तेजा पर्दे पर हमेशा की तरह ऊर्जा से भरपूर हैं। जब वह एक्शन करते हैं या अपने सिग्नेचर स्टाइल में कोई डायलॉग बोलते हैं, तो थिएटर में बैठे फैंस खुशी से झूम उठते हैं। यह फिल्म सिर्फ और सिर्फ उनके लिए है।
- ज़बरदस्त एक्शन शॉट्स: एक्शन सीक्वेंस फिल्म की जान हैं। खासकर जब लक्ष्मण भेरी अपने इलाके को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाता है, तो फाइट्स में दम नज़र आता है। डायरेक्टर ने एक्शन को स्टाइलिश बनाने की पूरी कोशिश की है।
- विलेन की धमक: नवीन चंद्रा ने विलेन शिवुडू के किरदार में डर और क्रूरता का अच्छा मिश्रण पेश किया है। वह भले ही बहुत ज़्यादा ‘आउट-ऑफ-द-बॉक्स’ विलेन न हो, लेकिन अपनी मौजूदगी से फिल्म में तनाव बनाए रखते हैं।
नकारात्मक पहलू: कहाँ चूक गई फिल्म?
- रिश्तों में गर्मी नहीं: लक्ष्मण और तुलसी (श्रीलीला) का रोमांस बहुत मजबूरन सा लगता है। दोनों के बीच की केमिस्ट्री जमने से पहले ही कहानी आगे बढ़ जाती है।
- बेकार के हिस्से: फिल्म में कई ऐसे सीन हैं जिनका मुख्य कहानी से कोई लेना-देना नहीं है। खासकर कुछ कॉमेडी और रोमांटिक गाने जबरदस्ती ठूंसे हुए लगते हैं, जो फिल्म की गति को धीमा कर देते हैं।
- पुराना बैकग्राउंड स्कोर: संगीत (भीम्स सीसिरोलेओ) मास अपील के लिए बनाया गया है, लेकिन कई बार यह इतना तेज़ और शोरगुल वाला हो जाता है कि असल भावनाओं को दबा देता है।
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अंतिम फैसला: क्या इसे देखना चाहिए?
‘मास जथारा’ एक ‘फास्ट फूड’ सिनेमा है देखने में चटपटा, लेकिन पौष्टिक नहीं। यह एक ऐसा फार्मूला है जिसे कई बार आजमाया जा चुका है और ‘मास जथारा’ इसे ताज़ा करने में नाकाम रहती है।
अगर आप रवि तेजा के अंधभक्त हैं और बस उनकी एक्टिंग और धमाकेदार एक्शन देखने थिएटर जाना चाहते हैं, तो जाइए, आप निराश नहीं होंगे। लेकिन अगर आप कहानी, निर्देशन या किसी नई स्क्रिप्ट की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो यह जथारा आपको थका देगी।
रेटिंग: 2.5/5 स्टार ⭐⭐