Ziddi Ishq Season 1 Review – हाल ही में मैंने ‘ज़िद्दी इश्क़’ (Ziddi Ishq) का पहला सीज़न देखा। नाम से ही समझ आ रहा है कि यहाँ मामला सीधा-सादा नहीं है। यह सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि जुनून, कॉर्पोरेट साज़िश और न्याय की लड़ाई का एक ज़बरदस्त कॉकटेल है। अगर आप ‘परिणीता’ (बंगाली फिल्म) से पहले से वाकिफ हैं, तो कहानी का कोर आपको पता होगा, पर यहाँ हिंदी तड़का कैसा है? आइए, खुलकर बात करते हैं।
Ziddi Ishq Season 1 Review
कहानी का दिल कहाँ धड़कता है?
कल्पना कीजिए, आप एक पड़ोस में बड़े होते हैं और अपने ट्यूशन टीचर से बचपन से ही बेइंतहा प्यार करते हैं। लेकिन यह प्यार शांत नहीं, बल्कि एक तूफ़ानी ज़िद है – यही है मेहुल (Aaditi Pohankar)।
मेहुल के लिए शेखर दा (परमब्रत चट्टोपाध्याय) उसका सब कुछ हैं। जब शेखर दा पर अचानक मोलेस्टेशन का एक गंभीर आरोप लगता है और खबर आती है कि उन्होंने आत्महत्या कर ली, तो मेहुल की दुनिया तहस-नहस हो जाती है। अब उसका इश्क़ प्रतिशोध में बदल जाता है। उसे यकीन है कि शेखर दा निर्दोष हैं और वह उन्हें न्याय दिलाने के लिए निकल पड़ती है। मेहुल की यह ज़िद उसे कॉर्पोरेट दुनिया के काले सच और गहरे रहस्यों के बीच खींच लाती है। उसके इस मुश्किल सफ़र में उसका यार आनंद (प्रियांशु पैन्युली) उसका साथ देता है।
क्या चीज़ें दिल को छू गईं? (The High Points)
- आदिति पोहनकर: शो की जान: सच कहूँ तो, आदिति ने मेहुल के किरदार को जीया है। उनका जुनूनीपन और आंखों में बदला लेने की आग – वाह! आप किरदार से प्यार नहीं करेंगे, लेकिन उसकी तीव्रता को महसूस ज़रूर करेंगे। एक महिला जो हर हाल में अपने प्यार को न्याय दिलाना चाहती है, उस जज़्बे को उन्होंने पर्दे पर कमाल का उतारा है।
- परमब्रत का ठहराव: परमब्रत चट्टोपाध्याय का अभिनय हमेशा ही क्लासिक होता है। वह कम समय के लिए आते हैं, लेकिन सादगी और भावनात्मक गहराई से कहानी में अपना असर छोड़ जाते हैं।
- थ्रिलर एलिमेंट है बॉस: शुरू में लव स्टोरी थोड़ी धीमी लगती है, पर जैसे ही शेखर दा की मौत का रहस्य खुलता है, कहानी तेज़ रफ़्तार पकड़ लेती है। सस्पेंस और कॉर्पोरेट ड्रामा का मिश्रण आपको सीट से हिलने नहीं देता।
कहाँ पर थोड़ी सी निराशा हुई? (The Low Points)
- स्क्रिप्ट में थोड़ा झोल: ईमानदारी से कहूँ तो, कहानी कई जगह पर थोड़ी कमज़ोर लगती है। मेहुल का जुनून कई बार अतार्किक (Illogical) लगता है। ऐसा लगता है जैसे स्क्रिप्ट राइटिंग के वक़्त कुछ हिस्सों पर ध्यान कम दिया गया।
- कुछ किरदार फीके लगे: जहाँ मेन लीड्स ने अच्छा काम किया है, वहीं कुछ सपोर्टिंग रोल-खासकर सुमित व्यास और रिया सेन-थोड़े कृत्रिम (Artificial) और असहज लगे। उनकी एक्टिंग कहीं-कहीं ओवर-द-टॉप महसूस होती है।
- रिमेक का असर: चूँकि यह एक रीमेक है, जो लोग ओरिजिनल से परिचित हैं, उन्हें कहानी में नयापन कम मिलेगा। काश, हिंदी रूपांतरण में कुछ अनपेक्षित मोड़ डाले जाते!
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मेरा सीधा-सपाट फ़ैसला
अगर आप ‘ज़िद्दी इश्क़’ देखें तो क्या उम्मीद रखें?
यह सीरीज़ आपको एक ऐसी महिला की कहानी दिखाती है जिसका प्यार उसकी सबसे बड़ी ताक़त और उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी दोनों है।
अगर आपको धीमी शुरुआत वाली, लेकिन जुनूनी और सस्पेंस से भरी थ्रिलर ड्रामा पसंद है, और आप आदिति पोहनकर की दमदार परफॉर्मेंस देखना चाहते हैं, तो इसे एक मौका ज़रूर दें। यह एक वन-टाइम वॉच तो है, जो आपको सोचने पर मजबूर करेगी कि प्यार की आख़िरी हद क्या होती है?
